वोलैटिलिटी मीट्रिक्स
पोर्टफोलियो की अस्थिरता मापने वाले मुख्य संकेतकों का अवलोकन और उन्हें व्यवहार में पढ़ने के तरीके।
शनिवार, 2 अप्रैल 2022

वोलैटिलिटी पोर्टफोलियो या किसी एसेट की कीमतों में होने वाले उतार–चढ़ाव को मापती है। निवेशक इसके आधार पर अनुमान लगाते हैं कि प्रतिफल कितनी बार और कितनी मात्रा में औसत से भटक सकता है।
सारांश
मानक विचलन
सबसे सामान्य मापदण्ड मानक विचलन है। इसे आवधिक प्रतिफलों का औसत निकालकर, प्रत्येक अवधि के विचलन को वर्ग कर, संपूर्ण डेटा का वर्गमूल लेने से प्राप्त किया जाता है। उच्च मानक विचलन अधिक अस्थिरता दर्शाता है।
ऐतिहासिक बनाम निहित वोलैटिलिटी
ऐतिहासिक वोलैटिलिटी बीते प्रतिफलों पर आधारित होती है, जबकि निहित (implied) वोलैटिलिटी भविष्य के विकल्प मूल्यों से अनुमानित की जाती है। दोनों का संयोजन निवेशक को अपेक्षित जोखिम की व्यापक तस्वीर देता है।
डाउनसाइड फोकस
कई विश्लेषक सेमी-डेविएशन या डाउनसाइड वोलैटिलिटी भी देखते हैं, जो केवल नकारात्मक विचलनों का मानक विचलन है। यह बताता है कि पोर्टफोलियो की “बुरी” चालें कितनी तीव्र रही हैं।
व्यावहारिक सुझाव
- अलग-अलग परिसंपत्तियों की वोलैटिलिटी का वार्षिकीकृत रूप में तुलना करें ताकि समय अवधि का प्रभाव न रहे।
- केवल वोलैटिलिटी देखने की बजाय उसे प्रतिफल के साथ जोड़ें; यही कारण है कि शार्प या सॉर्टिनो जैसे जोखिम-समायोजित अनुपात लोकप्रिय हैं।
- अस्थिरता उच्च होने का अर्थ हमेशा बुरा प्रदर्शन नहीं होता; युवा या ग्रोथ कंपनियाँ उच्च वोलैटिलिटी के बावजूद लंबी अवधि में उच्च प्रतिफल दे सकती हैं।
संक्षेप में, वोलैटिलिटी मीट्रिक्स यह समझने में मदद करते हैं कि पोर्टफोलियो का व्यवहार कितना “अनिश्चित” है और यह अनिश्चितता आपके जोखिम प्रोफाइल के अनुकूल है या नहीं।
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