मैक्सिमम ड्रॉडाउन को समझें
सबसे बड़े पीक-टू-ट्रफ गिरावट से निवेश जोखिम का अंदाज़ा कैसे लगाया जाए।
शुक्रवार, 28 अप्रैल 2023

यह क्यों महत्त्वपूर्ण है
मैक्सिमम ड्रॉडाउन (MDD) बताता है कि किसी अवधि में पोर्टफोलियो ने उच्चतम बिंदु से न्यूनतम बिंदु तक कितनी प्रतिशत गिरावट झेली। यह “सबसे खराब स्थिति” का अंदाज़ देता है, जिससे निवेशक अपनी जोखिम सहनशक्ति का मूल्यांकन कर सकते हैं।
कदम-दर-कदम गणना
- विश्लेषण अवधि में उच्चतम नेट एसेट वैल्यू (Peak) पहचानें।
- उसके बाद आने वाले न्यूनतम मूल्य (Trough) को खोजें।
- प्रतिशत गिरावट निकालें: $MDD = \frac{Trough - Peak}{Peak}$
उपयोगी अंतर्दृष्टि
- कम MDD ⇒ कम डाउनसाइड जोखिम।
- उच्च MDD ⇒ भले ही रिटर्न आकर्षक हों, पोर्टफोलियो बहुत तनावपूर्ण हो सकता है।
सीमाएँ
- MDD अवधि बताता है, रिकवरी टाइम नहीं।
- यह केवळ पिछले डेटा पर निर्भर है; भविष्य अलग हो सकता है।
पोर्टफोलियो प्रबंधन में भूमिका
MDD को अन्य मीट्रिक्स (Calmar Ratio, Ulcer Index, Sharpe Ratio) के साथ देखने पर जोखिम-समायोजित प्रदर्शन की सही तस्वीर मिलती है। रिबैलेंसिंग करते समय यह तय करें कि क्या वर्तमान रणनीति आपके “नींद सूचकांक” के अनुरूप है।
निवेशक को यह स्पष्ट होना चाहिये कि वे अधिकतम कितनी गिरावट झेल सकते हैं—MDD इस प्रश्न का सीधा जवाब प्रदान करता है।
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